कसोल धीमे सफ़र का फल देता है, पर ज़्यादातर लोग गिने हुए दिन लेकर आते हैं। ये तीनों प्लान मानकर चलते हैं कि आप रात की बस से आते हैं और सुबह-सुबह भुंतर पहुँचते हैं; अगर देर से पहुँचें तो सब कुछ आधा दिन आगे खिसका लें।
कौन-सा प्लान आपके लिए है
| प्लान | घाटी में रातें | आप क्या देखेंगे | किसके लिए सबसे अच्छा |
|---|---|---|---|
| वीकेंड | 2 | कसोल, छलाल, मणिकर्ण | दिल्ली या चंडीगढ़ से पहली यात्रा |
| चार दिन | 4 | साथ में तोष और खीरगंगा ट्रेक | सक्रिय यात्री |
| एक हफ़्ता | 6–7 | साथ में कलगा, पुलगा, ग्रहण या मलाणा | धीमा सफ़र और लंबा ठहराव |
एक वीकेंड: 2 रातें
- दिन 1: भोर के आसपास भुंतर पहुँचें और कसोल की लोकल बस लें। चेक-इन करें, एक घंटा सोएँ, फिर इत्मीनान से लंबा नाश्ता करें। दोपहर बाद पैदल पुल पार करके छलाल जाएँ और नदी के किनारे-किनारे लौटें। शाम बाज़ार में।
- दिन 2: सुबह जल्दी की बस से मणिकर्ण जाएँ: गुरुद्वारा, गर्म स्नान, लंगर और पुराना बाज़ार। दोपहर की शुरुआत तक कसोल लौटकर नदी किनारे के किसी कैफ़े में बैठें। दम बचा हो तो ग्रहण के रास्ते का पहला घंटा चलकर लौट आएँ।
- दिन 3: आख़िरी नाश्ता, फिर दिन की बस के लिए नीचे भुंतर, या दिन यहीं बिताकर शाम की वोल्वो लें।
सब कुछ तय चाहिए? दिल्ली से तीन दिन के पैकेज काफ़ी हद तक इसी रूपरेखा पर चलते हैं।
चार दिन: कसोल, तोष और खीरगंगा
- दिन 1: कसोल और छलाल, ऊपर की तरह। कैश निकाल लें और ट्रेक के लिए छोटा बैग पैक करें।
- दिन 2: सुबह की बस से बरशैणी, जल्दी निकलें तो रास्ते में मणिकर्ण रुकते हुए। पैदल या गाड़ी से ऊपर तोष पहुँचें। दोपहर बाद झरने तक की सैर; रात तोष में।
- दिन 3: पैदल नीचे बरशैणी उतरें और सुबह 9 बजे तक नकथान होते हुए खीरगंगा के लिए निकल पड़ें। दोपहर के बीच तक ऊपर पहुँचें, गर्म कुंड में नहाएँ और मौजूदा स्थानीय नियमों का पालन करते हुए पास ही रात रुकें।
- दिन 4: कलगा होते हुए जंगल वाले रास्ते से बरशैणी उतरें, फिर बस से कसोल। भुंतर से शाम की वोल्वो, या एक रात और।
ट्रेकिंग में नए हैं? गाइडेड खीरगंगा पैकेज दिन 3 और 4 की जगह ले लेता है, सारे इंतज़ाम के साथ।
एक हफ़्ता: इत्मीनान की घाटी
- दिन 1–2: कसोल, छलाल और मणिकर्ण।
- दिन 3: ग्रहण तक हाइक करें और होमस्टे में रुकें; या टैक्सी से मलाणा जाकर दिन भर की सावधानी भरी यात्रा करें।
- दिन 4: कसोल लौटें, फिर बस से बरशैणी और ऊपर कलगा या पुलगा चढ़ें।
- दिन 5: कम ही कुछ करने का दिन: फ़ेयरी फ़ॉरेस्ट, तीन गाँवों का चक्कर, एक किताब।
- दिन 6: कलगा से खीरगंगा का ट्रेक; रात वहीं।
- दिन 7: नकथान होते हुए नीचे, फिर नज़ारे के साथ आख़िरी रात के लिए ऊपर तोष — या सीधे वापस कसोल।
मनाली जोड़ना
मनाली कसोल से 75–80 किमी है। दो अतिरिक्त दिन हों तो आप कुल्लू घाटी में ऊपर जा सकते हैं, ओल्ड मनाली और हिडिंबा मंदिर देख सकते हैं और अटल टनल से होकर सिस्सू का डे-ट्रिप कर सकते हैं। दिल्ली के लिए मनाली से ही निकलें; वोल्वो बसें वहीं से शुरू होती हैं।
किसी भी प्लान को कारगर बनाना
- घाटी में ऊपर जाने से पहले वापसी की बस बुक कर लें, ख़ासकर रविवार की रातों के लिए।
- पहली सुबह हल्की रखें: बस में आपकी नींद ठीक से नहीं हुई होगी।
- तोष, कलगा या खीरगंगा जाते समय बड़े बैग कसोल के अपने गेस्टहाउस में छोड़ दें।
- मानसून में ट्रेक छोड़ दें और एक अतिरिक्त दिन जोड़ लें। सुरक्षा और मानसून देखें।
- सर्दियों में खीरगंगा की जगह तोष में दूसरी रात रखें और बर्फ़ का मज़ा लें।
शिमला और बाकी हिमाचल जोड़ना
कसोल हिमाचल के क्लासिक सर्किट में आसानी से फिट होता है: मंडी होकर शिमला से मनाली, और भुंतर से पार्वती घाटी की ओर एक मोड़। आते या जाते समय अंग्रेज़ों की पुरानी ग्रीष्मकालीन राजधानी में दो दिन बिताने हों, तो हमारी शिमला ट्रैवल गाइड मॉल रोड, रिज और टॉय ट्रेन के बारे में बताती है।
धर्मशाला, स्पीति और दूसरी घाटियों के लिए हमारी हिमाचल प्रदेश ट्रैवल गाइड में पूरे राज्य के लंबे यात्रा-कार्यक्रम हैं।

