पार्वती घाटी का असली मक़सद पैदल चलना ही है। इसके आधे गाँवों में सड़क नहीं है, और सबसे अच्छी जगहें — बुग्याल में गर्म कुंड, बादलों के ऊपर बालकनी जैसा गाँव — सिर्फ़ पैदल पहुँची जाती हैं। तालिका में ज़रूरी बातें हैं; ब्योरा और लिंक उसके बाद।
ट्रेक एक नज़र में
| ट्रेक | कहाँ से | दूरी / समय | सबसे ऊँचा बिंदु | कठिनाई | सबसे अच्छे महीने |
|---|---|---|---|---|---|
| छलाल | कसोल | 2–3 किमी, एक तरफ़ 30 मिनट | लगभग 1,600 मीटर | बहुत आसान | साल भर |
| रसोल | कसोल | 8 किमी, चढ़ाई में 3–4 घंटे | लगभग 2,500 मीटर | मध्यम, खड़ी चढ़ाई | मार्च–जून, सितंबर–नवंबर |
| ग्रहण | कसोल | 8–10 किमी, 4–5 घंटे | लगभग 2,350 मीटर | आसान–मध्यम | अप्रैल–जून, सितंबर–नवंबर |
| तोष → कुटला | तोष | 3–4 किमी, 1.5–2 घंटे | लगभग 2,800 मीटर | आसान | अप्रैल–नवंबर |
| खीरगंगा | बरशैणी | 12 किमी, चढ़ाई में 5–6 घंटे | लगभग 2,950 मीटर | आसान–मध्यम | अप्रैल–जून, मध्य सितंबर–नवंबर |
| सर पास | कसोल | 48 किमी, 4–5 दिन | लगभग 4,200 मीटर | मध्यम | मई–जून |
| पिन पार्वती पास | बरशैणी | 100 किमी, 10–11 दिन | 5,319 मीटर | कठिन | जुलाई–मध्य सितंबर |
कसोल से आसान सैर
छलाल का नदी किनारे वाला रास्ता समतल, छायादार और हर किसी के लायक है। तोष से झरने तक और आगे कुटला के बुग्यालों तक की सैर कम मेहनत में बड़े नज़ारे देती है। बरशैणी के आसपास कलगा, तुलगा और पुलगा का चक्कर आधे दिन का आसान काम है।
डे हाइक और एक रात के ट्रेक
ग्रहण पहली ढंग की हाइक के लिए सबसे अच्छा है: होमस्टे वाले लकड़ी के गाँव तक जंगल का रास्ता। रसोल छोटा पर कहीं ज़्यादा खड़ा है। दोनों लंबे दिन में हो सकते हैं, पर दोनों ऊपर एक रात रुकने के साथ बेहतर हैं।
खीरगंगा
घाटी की पहचान वाला ट्रेक: बरशैणी से 12 किमी, लगभग 2,950 मीटर पर गर्म पानी के कुंड वाले बुग्याल तक। दो रास्ते — नकथान गाँव होकर या कलगा से जंगल के बीच — आपको चक्कर बनाने देते हैं। ज़्यादातर लोग दो दिन लेते हैं। पूरा ब्योरा खीरगंगा पेज पर है। यह पार्वती घाटी का इकलौता ट्रेक है जिसे आप GetYourGuide पर गाइडेड पैकेज के रूप में बुक कर सकते हैं।
सर पास
कसोल से बरशैणी तक चार से पाँच दिन में लगभग 4,200 मीटर की बर्फ़ीली धार को पार करना, जो आम तौर पर मई और जून में किया जाता है। यह असली हाई-ऑल्टिट्यूड ट्रेक है पर इसमें तकनीकी हुनर नहीं चाहिए, इसीलिए इसे इतनी बार पहले ट्रेक के तौर पर चुना जाता है। दिन-दर-दिन के रूट के लिए सर पास पेज पढ़ें। हमें GetYourGuide पर सर पास की कोई लिस्टिंग नहीं मिली; किसी पंजीकृत ऑपरेटर या यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के साथ बुक करें, जो कसोल के बेस कैंप से हर साल बड़ा कार्यक्रम चलाती है।
पिन पार्वती पास
सबसे बड़ा: बरशैणी से स्पीति के मुद तक दस या ग्यारह दिन, 5,319 मीटर के ग्लेशियर वाले दर्रे के ऊपर से। सिर्फ़ अनुभवी ट्रेकरों के लिए, पेशेवर टीम के साथ। पिन पार्वती पेज देखें।
गाइड या ऑपरेटर चुनना
- राज्य के पर्यटन विभाग में पंजीकृत ऑपरेटर लें, और पूछें कि आपका असली गाइड कौन होगा।
- ग्रुप के आकार, गाइड और ट्रेकरों के अनुपात, फ़र्स्ट-एड ट्रेनिंग के बारे में पूछें और यह भी कि किसी को वापस मुड़ना पड़े तो क्या होगा।
- ऊँचे ट्रेकों के लिए जाँच लें कि आज़माई हुई निकासी योजना है और ऑक्सीजन व ढंग की मेडिकल किट साथ चलती है।
- सबसे सस्ते भाव से सावधान रहें। कटौती खाने, टेंटों और स्टाफ़ की तनख़्वाह में होती है।
- छोटी हाइक के लिए गेस्टहाउस दिन भर के लिए स्थानीय गाइड से मिलवा सकते हैं।
नियम और रजिस्ट्रेशन
कुल्लू ज़िला प्रशासन हादसों के बाद और ख़राब मौसम में समय-समय पर ट्रेकिंग के नियम सख़्त करता है: चेक पोस्ट पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, अकेले ट्रेकिंग पर पाबंदी, और मानसून व सर्दियों में पूरी बंदी। ख़ुद खीरगंगा के बुग्याल पर कैंपिंग 2018 से प्रतिबंधित है। हमेशा वहीं पूछ लें कि अभी क्या लागू है।
किसी भी रास्ते पर क्या साथ रखें
- पकड़ वाले जूते, बारिश से बचाव का कपड़ा और एक गर्म कपड़ा — धूप वाली सुबह में भी।
- कम से कम एक लीटर पानी, कुछ खाने का सामान और टॉर्च।
- छोटे नोटों में कैश; सीज़न में लोकप्रिय रास्तों पर चाय की दुकानें हैं पर ATM नहीं।
- ऑफ़लाइन मैप वाला चार्ज किया हुआ फ़ोन, यह जानते हुए कि रास्ते के बड़े हिस्से में सिग्नल नहीं होगा।
- अपने कचरे के लिए एक थैला।
सुरक्षित रहना
बरसों में इस घाटी में कई ट्रेकर लापता हुए हैं, लगभग हमेशा अकेले चलते हुए या मुख्य रास्ते से हटकर। अकेले ट्रेक न करें, किसी को अपना रूट और लौटने का समय बताएँ, जल्दी निकलें, ख़राब मौसम में वापस मुड़ें और उफ़नती नदी व नालों को पार करने की जगहों से काफ़ी दूर रहें। और जानकारी हमारे सुरक्षा पेज पर है।

